संस्था के नियम एवं उद्देश्य
उद्देश्य :-
- अध्यात्मपुंज, युगपुरूष पूज्य श्री तारण तरण मंडलाचार्य महाराज द्वारा रचित ग्रन्थों, तारणवाणी एवं आध्यात्म ज्ञान को आधुनिक सम्प्रेषण माध्यमों के जरिये देष एवं विदेषों में प्रचारित एवं प्रसारित करना।
- समाज के निर्धन, निषक्तजनों विधवा, वृद्धों अनाथ एवं उपेक्षित वर्गों की सहायता करना।
- युवा वर्ग हेतु व्यक्तितव विकास, रोजगार संबंधी प्रषिक्षण एवं मार्गदषन हेतु स्वरोजगार उद्यमिता विकास कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं का आयोजन करना।
- प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करनें वाले व्यक्तियों/प्रतिभाओं को सम्मानित करना।
- सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयेाजन एवं संचालन।
- शिक्षण संस्थाओं, जनउपयोगी धर्मशालाओं और औषधालाओं का निर्माण में सहयोग एवं संचालन।
- समाज में एकता सामन्जस्य समन्वय एवं सषक्त संगठन बनाये रखने की दिशा में सकारात्मक वातावरण एवं सोच के निर्माण में सहभागिता।
- समाज में नवीन उर्जा, चैतन्यता एवं जागरूकता के संचार की दिशा में पहल करना।
- सूचनाओं जानकारी संचार एवं जीवंत संपर्क बनाये रखने संबंधी साहित्य का प्रकाशन करना।
विकास यात्रा के कुछ कदम :-
- निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयेाजन मार्च 1993 में निसई जी में।
- आध्यात्मिक एवं बौद्धिक कार्यक्रम का आयेाजनः 30 मई 1993 में प्रथम स्थापना दिवस टीटीटीआई सभागार में।
- प्रवचनकार एवं चिन्तकः बा ब्र श्रद्धेय श्री बसंत जी महाराज, डा हुकुम चंद भारिल्ल राजमल पवैया
- मुख्य अतिथिः स्व श्रीमंत समाजभूषण श्री डालचंद जी जैन सागर, अध्यक्षताः श्री महेष श्रीवास्तव, संपादक दैनिक भास्कर
- तारण समाज का सर्वेक्षणः समाज में व्याप्त समस्यओं एवं कुरीतियों के कारण एवं समाधान हेतु प्रष्नावलियों भेजकर सर्वेक्षण कराया गया। प्रातः 103 प्रष्नावलियों का विषलेषण, मूल्यांकन, आकंलन करके निष्कर्ष और सुझावों की रिपोर्ट मंथन तैयार की गई। जो कि समाजिक उत्थान नवीन जागृति एवं चेतना की लहर पेैदा करने का एक शंखनाद था।